Changing
The Past

© Donna

About The Poem

This poem explains how a person has had a difficult life in his past and can't get through it, however, you have to move on from the past and look forward to the future instead of being forever stuck in a slump.

Changing The Past

by:
© Donna

The past is the past for a reason.
That is where it is supposed to stay,
But some cannot let it go.
In their heads it eats away

Until all their focus becomes
The person they used to be,
The mistakes they made in their life.
Oh, if only they could see

That you cannot change what happened,
No matter how hard you try,
No matter how much you think about it,
No matter how much you cry.

What happens in your lifetime
Happens for reasons unknown,
So you have to let the cards unfold.
Let your story be shown.

Don't get wrapped up in the negative.
Be happy with what you have been given.
Live for today not tomorrow.
Get up, get out, and start living,

Because the past is the past for a reason.
It's been, and now it is gone,
So stop trying to think of ways to fix it.
It's done, it's unchangeable; move on.

Source: https://www.familyfriendpoems.com/poem/changing-the-past

गुज़र गया सो गुज़र गया

लेखक :
© डौना
Transcreated by:
‘Ambar’ Kharbanda

अब क्या इन बातों में रक्खा!

गुज़र गया जो, गुज़र गया है

गुज़र गए जो लम्हे उनको याद करें तो हासिल क्या है!

(गुज़र गया जो, गुज़र गया है)

लेकिन कुछ लोगों के लिए वो,

लम्हें जैसे ठहर गए हों

उनके दिल-दिमाग में जैसे

वो लम्हे ही पसर गए हों

कहाँ-कहाँ पर भूल हुई है,

हरदम यही सोचते रहना

कहाँ-कहाँ मैं चूक गया हूँ,

ख़ुद से यही पूछते रहना

क्या ऐसी बातों से कुछ हल निकला है,

जो अब निकलेगा!

क्या कोई उलझा सवाल तब सुलझा है,

जो अब सुलझेगा!

जो होना था हुआ,

उस पर पछताने से कुछ भी न होगा

दीवारों से अपने सर को टकराने से

कुछ भी न होगा जो होना था हुआ,

उसे तुम हरगिज़ बदल नहीं सकते हो

गुज़रे हुए ज़माने की छाया से निकल नहीं सकते हो

जो कुछ भी होता है उसका कोई तो मतलब होता है

जैसा तुम चाहो वैसा ही,

सोचो तो कब-कब होता है

जो कुछ तुम्हें मिला है उसमें ख़ुश रहने की आदत डालो

आज जिओ जी भर के,

कल की चिंताओं को दिल से निकालो

इन बातों में कुछ नहीं रक्खा!

गुज़र गया जो, गुज़र गया है

गुज़र गए जो लम्हे उनको याद करें तो हासिल क्या है!

(गुज़र गया जो, गुज़र गया है)